
Jaya Prada: एक सितारा जो स्क्रीन से निकलकर जनता के बीच चमका
Jaya Prada Biography and Net Worth: भारतीय सिनेमा में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जिन्हें सिर्फ उनकी फिल्मों से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और कामयाबी से भी पहचाना जाता है। जया प्रदा भी ऐसा ही एक नाम हैं—एक अभिनेत्री जिन्होंने पर्दे पर राज किया और फिर राजनीति में उतरकर लोगों की आवाज़ बनीं।
3 अप्रैल 1962 को आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में जन्मीं जया प्रदा का सफ़र किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
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Jaya Prada Biography and Net Worth
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| जन्म तिथि | 3 अप्रैल 1962 (मंगलवार) |
| आयु (2025 में) | 63 वर्ष |
| जन्मस्थान | राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश |
| राशि | मेष |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| गृहनगर | राजमुंदरी |
| स्कूल | तेलुगु मिडिल स्कूल, राजमुंदरी |
| शैक्षिक योग्यता | 12वीं पास, B.Com (पहले वर्ष में छोड़ा) |
| कॉलेज | रजलक्ष्मी वूमेन्स कॉलेज, राजमुंदरी |
| धर्म | हिंदू |
| खानपान | नॉन-वेजिटेरियन |
| शौक | नृत्य, संगीत सुनना |
साधारण परिवार से बड़े सपनों तक
जया प्रदा का बचपन एक साधारण मध्यमवर्गीय तेलुगु परिवार में बीता। उनकी मां चाहती थीं कि बेटी पढ़ाई के साथ-साथ कला भी सीखे, इसलिए उन्होंने छोटी उम्र से ही नृत्य और संगीत की कक्षाओं में उन्हें दाखिला दिला दिया। शायद किसी को भी तब नहीं लगा होगा कि यही कला आगे चलकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी।
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पहला मौका जिसने बदल दिया किस्मत का रास्ता
कहते हैं कि जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जो पूरी दिशा बदल देते हैं।
जया प्रदा के लिए वो पल तब आया जब वे 12 साल की थीं।
एक स्कूल फंक्शन में उन्होंने नृत्य किया और दर्शकों में बैठे एक फिल्म निर्देशक उनकी प्रतिभा से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने तुरंत अपनी फिल्म में एक छोटे से डांस रोल का ऑफर दिया।
यही छोटा-सा रोल भविष्य की सुपरस्टार के लिए एक बड़ा दरवाज़ा साबित हुआ।
फिल्मी करियर: खूबसूरती और अभिनय का अनोखा संगम
जया प्रदा ने अपनी मेहनत, शालीनता और अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया।
| भाषा/माध्यम | फिल्म/शो |
|---|---|
| तेलुगु | भूमि कोसम (1974) |
| कन्नड़ | सनादी अप्पन्ना (1977) |
| हिंदी | सरगम (1979) |
| तमिल | निनैथाले इनिक्कुम (1979) |
| मलयालम | इनियुम कथा थुडरुम (1985) |
| बंगाली | आमी सेई मेये (1998) |
| मराठी | आधार (2000) |
| मल्टीलिंगुअल (हिंदी-इंग्लिश-चीनी) | द डिज़ायर (2010) |
| टीवी | जयप्रदाम (तेलुगु टॉक शो) |
अपने दो दशक लंबे करियर में तेलुगु, हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम,बंगाली,मराठी इन सभी भाषाओं की 280 से अधिक फिल्मों में उन्होंने काम किया।
उन्होंने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जितेंद्र जैसे बड़े सितारों के साथ कई यादगार फिल्में कीं।
उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस, डांस और मासूमियत आज भी लोगों की यादों में ताज़ा है।
राजनीति का सफ़र: जनता के बीच नया किरदार
फिल्मों में अपार लोकप्रियता हासिल करने के बाद जया प्रदा ने 1994 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से राजनीति में कदम रखा।
- 2004: समाजवादी पार्टी (SP) की ओर से रामपुर लोकसभा सीट जीती
- बाद में अपना राजनीतिक दल राष्ट्रीय लोक मंच शुरू किया
- 2019: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुईं
राजनीति में उनका वक्त उतार-चढ़ाव भरा जरूर रहा, लेकिन उन्होंने हमेशा एक आत्मनिर्भर और मजबूत नेता की छवि बनाए रखी।
संपत्ति: एक सफल करियर का आर्थिक प्रतिबिंब
| वर्ष | कुल संपत्ति |
|---|---|
| 2019 | लगभग ₹27.92 करोड़ |
लक्जरी कारें
- मर्सिडीज बेंज
- आउटलैंडर
- फोर्ड एंडेवर
बंगले और अन्य संपत्ति
दिल्ली, मुंबई, गुड़गांव और चेन्नई में उनके कई मकान और बंगले मौजूद हैं जिनकी कुल कीमत करीब ₹9 करोड़ मानी जाती है।
परिवार और रिश्ते
| संबंध | विवरण |
|---|---|
| वैवाहिक स्थिति | विवाहित |
| पति | श्रीकांत नाहटा (फिल्म प्रोड्यूसर) |
| बच्चे | सौतेला बेटा – सिद्धू; कुल 3 सौतेले बच्चे |
| पिता | कृष्णा राव (फिल्म फाइनेंसर) |
| मां | नीलावनी (गृहिणी) |
| भाई-बहन | कोई नहीं |
राजनीतिक यात्रा
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1994 | तेलुगु देशम पार्टी (TDP) में शामिल हुईं |
| 1996 | राज्यसभा के लिए नामांकित |
| 2004 | SP में शामिल हुईं और रामपुर से लोकसभा चुनाव जीता (85,000+ वोटों से) |
| 2010 | SP से निष्कासित |
| 2011 | अमर सिंह के साथ राष्ट्रीय लोक मंच बनाया |
| 2014 | RLD में शामिल होकर बिजनौर से चुनाव लड़ा (हार हुई) |
| 2019 | बीजेपी में शामिल होकर रामपुर से चुनाव लड़ा (हार हुई) |
जया प्रदा सिर्फ फिल्मों की खूबसूरत अभिनेत्री नहीं थीं—वे एक ऐसे व्यक्तित्व की मिसाल हैं जिसने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई।
एक साधारण परिवार से निकलकर करोड़ों दिलों की धड़कन बनना और फिर राजनीति में जनता की सेवा के लिए उतरना—यह सफ़र अपने आप में प्रेरक है।
उनकी कहानी बताती है कि अगर हुनर, मेहनत और इरादा हो, तो जीवन में कोई भी मुकाम छोटा नहीं पड़ता।




